🕉️ मोक्षदा एकादशी की कथा – राजा वैखानस का मोक्ष रहस्य

By JayGuruDev

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Mokshada Ekadashi Katha and King Vaikhanas Moksha story

मोक्षदा एकादशी वर्ष की उन विशेष एकादशियों में से एक है, जिसे केवल व्रत और पूजा के कारण ही नहीं,
बल्कि अनगिनत पितरों को मुक्ति दिलाने और अज्ञान के अंधकार को हटाने के कारण सबसे महान माना गया है।
इस दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था—इसलिए यह तिथि ज्ञान, मोक्ष और धर्म-बल से अत्यंत मजबूत होती है।

मोक्षदा एकादशी की सबसे प्रसिद्ध कथा राजा वैखानस और उनके पिता की है,
जो सिखाती है कि कैसे एक संत पुत्र, ईश्वर की कृपा से अपने पितरों को भी मोक्ष प्रदान कर सकता है।

आइए सरल भाषा में, पूरी दिव्य कथा को विस्तार से समझते हैं।

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🌟 1. प्राचीन काल – राजा वैखानस का धर्मपूर्ण राज्य

बहुत समय पहले, चंपकवन नामक एक विशाल और सुंदर राज्य था।
इस राज्य का शासन राजा वैखानस के हाथों में था।
वे धर्मप्रिय, न्यायप्रिय और अपने प्रजा की भलाई में सदैव तत्पर रहते थे।

उनकी विशेषता यह थी—

  • वे शांति से राज करते थे
  • प्रजा प्रेम से रहती थी
  • वन, पर्वत, नदियाँ स्वच्छ और पवित्र थीं
  • पूरे राज्य में धार्मिक ऊर्जा बनी रहती थी

राजा वैखानस सबके प्यारे और आदरणीय थे।

लेकिन एक दिन ऐसा हुआ जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।


🌟 2. राजा का स्वप्न – पिता नरक में पीड़ित

मोक्षदा एकादशी से एक दिन पहले, राजा वैखानस ने रात में एक अजीब सपना देखा।

उन्होंने देखा—

⚫ उनके पिता नरक में भयंकर कष्ट झेल रहे हैं

⚫ शरीर जला हुआ

⚫ मन दुख से भरा हुआ

⚫ चारों ओर पीड़ा की चीखें

⚫ उनका पिता मदद की गुहार लगा रहा था

राजा ने जब यह दृश्य देखा तो वे सोते से तुरंत उठ गए।
उनका हृदय कांप उठा।
उन्होंने महसूस किया कि यह मात्र सपना नहीं—एक दैवी संकेत है।

वे समझ नहीं पाए कि उनके पुण्यात्मा पिता नरक में क्यों हो सकते हैं।
राजा की आंखें भर आईं और वे रातभर सो नहीं सके।

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🌟 3. समाधान की खोज – मुनियों के पास पहुंचे राजा

सुबह होते ही राजा ने अपने दरबार के श्रेष्ठ ब्राह्मणों और मुनियों को बुलाया।
उन्होंने पूरी घटना बताई और कहा—

“यदि मेरे पिता कष्ट में हैं, तो मैं यह जीवन उनका उद्धार किए बिना स्वीकार नहीं कर सकता।”

मुनियों ने गहन विचार किया और कहा—

“हे राजन, इस रहस्य को केवल पारमहंस पर्वत पर बैठे श्री पर्वत मुनि ही जान सकते हैं।
वे तपस्वी हैं और ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम हैं।”

राजा ने तुरंत वहाँ जाने का निर्णय लिया।


🌟 4. राजा का कठिन पर्वत यात्रा

पारमहंस पर्वत तक पहुँचना आसान नहीं था।
लेकिन राजा पैदल ही निकल पड़े।
वहाँ का मार्ग घने जंगलों, ऊँचे घाटों और खतरनाक रास्तों से भरा था।

लेकिन पिता की पीड़ा उन्हें आगे बढ़ाती रही।

कई घंटे कठिन चढ़ाई करने के बाद वे आखिरकार पर्वत पर पहुँचे।
वहाँ उन्होंने तप में लीन परमेष्ठी मुनि को देखा।

राजा ने उनके चरणों में गिरते हुए कहा—

“हे मुनिराज, कृपा करके बताएं मेरे पिता नरक में क्यों हैं और मैं उन्हें कैसे मुक्त कर सकता हूँ?”


🌟 5. मुनि ने बताया पिता के नरक में गिरने का कारण

परमेष्ठी मुनि ने ध्यान लगाया और अपनी दिव्य दृष्टि से पूरी स्थिति देखी।
कुछ क्षण बाद उन्होंने कहा—

“हे राजन, आपके पिता पिछले जन्म में एक अत्यंत धर्मात्मा व्यक्ति थे।
लेकिन जीवन में एक छोटा सा अपराध कर बैठे थे—

✔ उन्होंने अनजाने में किसी ब्राह्मण को अपमानित कर दिया था।

✔ उस अपमान का दंड उन्हें मिला और वे नरक में गए।

उनकी पीड़ा तभी खत्म हो सकती है जब कोई उनका पुत्र—

✔ महान व्रत

✔ पुण्य

✔ और विष्णु भक्ति

के माध्यम से उन्हें मुक्त करे।”

राजा रो पड़े…
उन्होंने कहा,
“हे मुनिराज, मैं उनके लिए अपना शरीर भी दे सकता हूँ। कृपया मार्ग बताएं!”


🌟 6. मोक्षदा एकादशी का रहस्य बताया गया

मुनि मुस्कुराए और बोले—

“सौभाग्य से कल ही मोक्षदा एकादशी है।
यदि आप पूरे नियम और शुद्ध भाव से व्रत करें और उसका फल अपने पिता को अर्पित करें…
तो आपका पिता तुरंत नरक से मुक्त होकर स्वर्ग लोक में चले जाएंगे।”

राजा ने हर्षित होकर प्रणाम किया और तुरंत अपने राज्य वापस आ गए।


🌟 7. राजा का शुद्ध भाव से व्रत – पूरे नियमों का पालन

अगले दिन राजा ने मोक्षदा एकादशी का व्रत संकल्प से शुरू किया:

  • गंगाजल स्नान
  • पीले वस्त्र
  • भगवान विष्णु का चित्र स्थापित
  • तुलसी, चंदन, केसर अर्पण
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप
  • गीता पाठ
  • फलाहार व्रत
  • दान और ब्राह्मण भोजन

पूरे दिन राजा ने केवल एक ही बात मन में रखी—

“मेरे पिताजी को मोक्ष मिले।”

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🌟 8. व्रत फल समर्पण – दिव्य चमत्कार

द्वादशी के दिन उन्होंने ब्राह्मणों को भोजन कराया और उसके बाद कहा—

“हे भगवान विष्णु! आज के व्रत का पूरा फल मैं अपने पिता को अर्पित करता हूँ।”

जैसे ही संकल्प पूरा हुआ,
स्वर्गलोक में घंटियाँ बज उठीं,
और दिव्य आकाशवाणी हुई—

“राजा वैखानस, तुम्हारे व्रत से तुम्हारे पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग लोक में प्रवेश कर चुके हैं।”

राजा का हृदय आनंद से भर गया।
उन्होंने विष्णु भगवान की स्तुति की और कहा—

“हे प्रभु, यदि मोक्ष देना किसी एक दिन में संभव है,
तो निस्संदेह मोक्षदा एकादशी सबसे महान एकादशी है।”


🌟 9. क्यों यह कथा इतनी महत्वपूर्ण है?

यह कथा हमें सिखाती है—

✔ व्रत का फल केवल हमारे लिए नहीं,

बल्कि हमारे पितरों का उद्धार भी कर सकता है।

✔ भगवान भाव के भूखे हैं।

राजा का सच्चा भाव ही उसके पिता का उद्धार बना।

✔ मोक्षदा एकादशी केवल पाप नहीं मिटाती,

बल्कि कर्मबंधनों को भी भंग करती है।

✔ पितरों के लिए सबसे उत्तम तिथि यही है।

इसीलिए यह एकादशी व्रतों की महारानी कही जाती है।


FAQs

Q1. मोक्षदा एकादशी की प्रसिद्ध कथा कौन सी है?

राजा वैखानस और उनके पिता को नरक से मुक्ति दिलाने की कथा सबसे प्रसिद्ध है।

Q2. राजा वैखानस के पिता नरक में क्यों थे?

उन्होंने पिछले जन्म में अनजाने में एक ब्राह्मण का अपमान किया था।

Q3. राजा ने अपने पिता को कैसे मुक्त किया?

मोक्षदा एकादशी का व्रत पूर्ण नियमों से किया और उसका फल पिता को समर्पित किया।

Q4. क्या यह व्रत पितृ दोष में लाभ देता है?

हाँ, यह पितृ मोक्ष देने वाली सर्वोत्तम तिथि मानी जाती है।

Q5. मोक्षदा एकादशी पर कौन सा मंत्र श्रेष्ठ है?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और गीता पाठ सबसे शुभ है।

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