Mokshada Ekadashi 2025 कब है? शुभ योग कौन-से बन रहे हैं? पारण का समय क्या रहेगा?
इन सबका उत्तर यहाँ आपको बिल्कुल सरल भाषा में मिल जाएगा।
मोक्षदा एकादशी को सबसे पवित्र एकादशी कहा गया है क्योंकि यह:
- पापों का क्षय करती है
- पितरों को मोक्ष दिलाती है
- मन और आत्मा को शुद्ध करती है
- और गीता जयंती का दिन भी है
इसलिए Mokshada Ekadashi 2025 हिन्दू कैलेंडर में एक अत्यंत शुभ और ऊर्जा से भरा हुआ दिन माना जाता है।
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📅 1. Mokshada Ekadashi 2025 कब है?
साल 2025 में मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी इसी दिन पड़ रही है।
- एकादशी तिथि शुरू: 30 नवंबर 2025, रात 09:29 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 1 दिसंबर 2025, शाम 07:01 बजे
इसलिए व्रत और पूजा 1 दिसंबर 2025 को ही की जाएगी।
🕯️ 2. 2025 में मोक्षदा एकादशी पारण कब करें?
द्वादशी तिथि 2 दिसंबर को सुबह शुभ समय में व्रत खोलना चाहिए।
✔ पारण का समय:
2 दिसंबर 2025 – सुबह 06:57 बजे से 09:03 बजे तक
इस समय के भीतर:
- स्नान
- पूजन
- तुलसी-जल अर्पण
- ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन
करके पारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
⭐ 3. मोक्षदा एकादशी 2025 के शुभ योग
1 दिसंबर 2025 को कई शुभ संयोजन बन रहे हैं:
✔ शुभ चंद्र योग
✔ विष्णु पूजा के लिए उत्तम वार (सोमवार)
✔ गीता जयंती का संयोग
✔ धार्मिक तिथि और पवित्र नक्षत्र
ये सभी योग इस दिन व्रत को अत्यंत प्रभावशाली बनाते हैं।
⚠️ 4. राहुकाल – ध्यान रखें
1 दिसंबर 2025 का राहुकाल:
❌ सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक
इस दौरान—
- पूजा
- नया कार्य
- दान
- संकल्प
नहीं करना चाहिए।
🕉️ 5. मोक्षदा एकादशी का महत्व
मोक्षदा एकादशी सिर्फ व्रत रखने का दिन नहीं है, बल्कि यह:
- जीवन से नकारात्मकता हटाती है
- मन को शुद्ध करती है
- पितरों को मुक्ति दिलाती है
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा लाती है
इस दिन गीता पाठ करना अत्यंत विशेष फल देता है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
📖 6. मोक्षदा एकादशी 2025 – पूजा विधि संक्षेप में
✔ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
✔ घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धि
✔ विष्णु भगवान की पूजा — धूप, दीप, चंदन, तुलसी
✔ “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप
✔ गीता का पाठ
✔ पितृ शांति की प्रार्थना
✔ फलाहार/निर्जला व्रत
✔ अगले दिन पारण
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🙏 7. 2025 में मोक्षदा एकादशी का पितृ मोक्ष महत्व
मोक्षदा एकादशी को ऐसा माना जाता है कि:
- इस दिन किया गया व्रत
- पितरों के नाम से किया गया दान
- या उनके लिए की गई प्रार्थना
उनकी आत्मा को आगे बढ़ाती है और मोक्ष मार्ग खोलती है।
राजा वैखानस की कथा इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
💫 8. 2025 में मोक्षदा एकादशी क्यों अत्यंत शुभ है?
क्योंकि यह वर्ष:
- सोमवार (शिव + विष्णु योग)
- गीता जयंती
- शुभ चंद्र प्रभाव
- मार्गशीर्ष मास
का संयुक्त मेल लेकर आता है।
इसलिए 2025 की मोक्षदा एकादशी आध्यात्मिक रूप से तेजस्वी और बहुत शुभ मानी गई है।
👁️ 9. मनोकामना पूर्ति के लिए क्या करें?
1 दिसंबर की शाम यह उपाय करें:
- तुलसी दल के साथ श्री विष्णु को जल अर्पित करें
- दीपक दक्षिण दिशा की ओर रखें
- अपनी मनोकामना मन में बोलें
- गीता के 18वें अध्याय का पाठ करें
बहुत लोग इस दिन अपनी अड़चनों से मुक्ति का अनुभव करते हैं।
💬 10. वास्तविक अनुभव
कई भक्त बताते हैं:
- पिछले वर्षों में मोक्षदा व्रत से पितृ संबंधी समस्याएँ कम हुईं
- मन अशांति दूर हुई
- जीवन में अचानक शुभ कार्य बनने लगे
- घर में शांति और सकारात्मकता बढ़ी
इसलिए इस एकादशी को “जीवन बदलने वाली तिथि” भी कहा जाता है।
❓ FAQs
1 दिसंबर 2025, सोमवार को।
2 दिसंबर 2025 को सुबह 06:57–09:03 के बीच।
क्योंकि यह पितृ मोक्ष और गीता जयंती का संयोग है।
हाँ, फलाहार या निर्जला – दोनों मान्य हैं।
भगवद् गीता, विशेषकर अध्याय 12, 15 या 18।
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