📅 Mahashivratri 2026 Date:
Tuesday, 3rd March 2026
(अर्थात् मंगलवार को महाशिवरात्रि होगी)
अब हम विस्तृत रूप से जानते हैं:
✔ शिवरात्रि क्या है
✔ इसका इतिहास और अर्थ
✔ शुभ मुहूर्त
✔ पूजा विधि
✔ व्रत, पारण नियम
✔ कर्म और भक्ति का महत्व
🕉️ महाशिवरात्रि क्या है?
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव को समर्पित है।
“शिव” को संहार, ध्यान, शक्ति और मोक्ष का देवता माना जाता है।
‘महाशिवरात्रि’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:
🔹 महान = महान / विशिष्ट
🔹 रात्रि = रात
यानी
👉 एक महान रात्रि जहाँ भगवान शिव की पूजा और ध्यान से जीवन में शांति, शक्ति और मुक्ति मिलती है।
📜 महाशिवरात्रि का इतिहास और पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि के कई कारण बताए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
🔹 1. शिव और पार्वती का विवाह
पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को प्राप्त किया।
उनका विवाह इसी रात्रि को हुआ माना जाता है।
🔹 2. सृष्टि का संहार और पुनः सृजन
जब शिव ने तांडव किया, ब्रह्मांड में संतुलन लाया गया।
🔹 3. विश्व कल्याण का दिन
जिस रात दुर्बलता और अज्ञानता नष्ट होती है
और ज्ञान, शक्ति, संयम व धर्म का उदय होता है।
🗓️ महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त 2026
🔹 Tithi Begins: 3 March 2026 – सुबह
🔹 Tithi Ends: 4 March 2026 – सुबह
🔹 Shubh Muhurat / श्रीकाल: 3 March दिन में/रात में अलग-अलग regions के अनुसार थोड़ा बदलता है।
(सटीक समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार देखें)
🔱 महाशिवरात्रि का महत्व
🌼 1. भक्ति और ध्यान
शिवरात्रि की रात भगवान शिव के ध्यान, भजन, जप और व्रत की रात मानी जाती है।
इस रात की साधना से
✔ मन की शांति मिलती है
✔ तनाव कम होता है
✔ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है
🌿 2. शिवलिंग पर अभिषेक
दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक शुभ माना जाता है।
हर आवरण का अपना फल है:
• दूध = शांति
• दही = शक्ति
• घी = विवेक
• शहद = प्रेम
• पंचामृत = समर्पण
📿 3. जप, भजन, कीर्तन
“ॐ नमः शिवाय” का नियमित जप सकारात्मकता बढ़ाता है।
रात्रि जागरण और भजन से मन आध्यात्मिक ऊर्जा से भरता है।
📖 कैसे करें महाशिवरात्रि पूजा? (Step-by-Step)
🔹 स्नान:
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में हल्का स्नान करें।
🔹 स्वच्छ स्थान पर पूजा की शुरुआत:
मंदिर या साफ जगह पर शिवलिंग स्थापित करें।
🔹 धूप-दीप जलाएं:
दीप, धूप, अगरबत्ती जलाएं।
🔹 शिवलिंग को पंचामृत/मिल्क से अभिषेक:
🍶 दूध (एक), दही (एक), घी (एक), शहद (एक), शक्कर (थोड़ी)
इनसे शिवलिंग का अभिषेक करें।
🔹 फूल, बेलपत्र चढ़ाएं:
बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल शिव को प्रिय माने जाते हैं।
🔹 चावल, कर्पूर, रोली:
चावल (अक्षत), लाल रोली से चंदन का तिलक चढ़ाएं।
🔹 भजन, कीर्तन व जप:
ॐ नमः शिवाय का जप 108 बार करने का विशेष फल है।
🔹 ध्यान और आरती:
पूजा के अंत में धीमी आरती करें।
🛕 व्रत और पारण (Fasting & Breaking Fast)
💠 व्रत:
बहुत लोग शिवरात्रि का व्रत निर्जल (बिना जल) रखते हैं,
तो कुछ साधारण उपवास करते हैं।
अन्न केवल फल, दूध या हल्का भोजन लिया जा सकता है।
💠 पारण:
अगली सुबह सूर्य देव उगने के बाद पारण किया जाता है
ताकि व्रत सिद्धि मिले।
📌 शुभ फल और लाभ
महाशिवरात्रि पर किये गए पूजा-उपासना से:
🌟 मन शांत होता है
🌟 जीवन में धन-योग बनता है
🌟 संकट से मुक्ति मिलती है
🌟 आत्मिक विकास होता है
🌟 नए कार्यों में सफलता मिलती है
🙏 महाशिवरात्रि पर साधना क्यों खास?
शिव की परिभाषा ही है:
“जो सब कुछ है, पर किसी चीज़ के लिए चाहत नहीं रखता।”
यह व्रत और साधना हमें सिखाती हैं:
👉 विराग – बिना तृष्णा का जीवन
👉 तप – अनुशासन और संयम
👉 ध्यान – एकाग्रता और शांति
❓ FAQs – महाशिवरात्रि 2026
यह भगवान शिव को समर्पित रात्रि है जो भक्ति, ध्यान और मोक्ष के लिए मनाई जाती है।
सुबह हल्का स्नान, पूरा दिन ध्यान, जप, पूजा, रात जागरण और अगली सुबह पारण।
बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, दूध, पंचामृत अति शुभ।
अगर संभव हो तो हाँ; नहीं तो रात्रि का बड़ा भाग भजन-कीर्तन में व्यतीत करना फलदायी है।
3 मार्च 2026 (मंगलवार) को है महाशिवरात्रि।






