🕉️ क्यों मोक्षदा एकादशी को सबसे पवित्र एकादशी माना जाता है?

By JayGuruDev

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Mokshada Ekadashi Pavitra significance explained

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन साल में आने वाली 24 एकादशियों में मोक्षदा एकादशी को सबसे ज्यादा पवित्र और शक्तिशाली माना गया है।
इस दिन रखे गए व्रत से न सिर्फ साधक के पाप नष्ट होते हैं, बल्कि पितरों को भी मोक्ष मिलता है।

इसके अलावा इस एकादशी का संबंध गीता जयंती से है—
यही वह दिन है जब श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद् गीता का दिव्य उपदेश दिया था।

यही कारण है कि यह एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का द्वार मानी जाती है।

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अब जानते हैं कि आखिर मोक्षदा एकादशी को सबसे पवित्र क्यों कहा जाता है।


🌟 1. यह एकादशी पितरों को मोक्ष दिलाती है

मोक्षदा एकादशी का सबसे बड़ा कारण यह है कि—

✔ यह व्रत पितरों के कष्ट दूर करता है

✔ पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष दिलाता है

✔ पितृ दोष समाप्त होता है

✔ परिवार पर आने वाली रुकावटें दूर होती हैं

धर्मग्रंथों में वर्णन है कि इस व्रत को करने से एक व्यक्ति पूरा कुल मुक्त कर सकता है।


🌟 2. यह एकादशी गीता जयंती का दिन है

इसी पावन दिन पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन के सबसे महान ज्ञान—

“भगवद् गीता”

का उपदेश दिया था।

इस दिन ब्रह्मांड में:

  • ज्ञान
  • सत्य
  • मोक्ष
  • कर्म
  • और धर्म

की ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय रहती है।

इसलिए इसे ज्ञान-एकादशी भी कहा जाता है।


🌟 3. यह एकादशी मन और आत्मा को शुद्ध करती है

अन्य एकादशियों की तरह यह केवल पाप नाशक नहीं—
बल्कि यह मन की जड़ तक जाकर शुद्धि करती है।

इसके प्रभाव से:

  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
  • मन शांत होता है
  • चिंता और तनाव कम होते हैं
  • भीतर आध्यात्मिक प्रकाश उत्पन्न होता है

इस कारण इसे आत्मशुद्धि की एकादशी भी कहा गया है।

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🌟 4. यह व्रत मोक्ष का मार्ग दिखाता है

“मोक्षदा” शब्द का अर्थ ही है—

✔ मोक्ष प्रदान करने वाली

धर्मग्रंथ कहते हैं:
यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत को करे, तो मृत्यु के बाद आत्मा उच्च लोकों की ओर जाती है।

यह व्रत:

  • भ्रम
  • भय
  • अज्ञान
  • नकारात्मक कर्म

को धीरे-धीरे मिटा देता है।


🌟 5. व्रत करने वाले के जीवन में शुभता बढ़ती है

इस दिन व्रत करने से:

  • घर में शांति
  • परिवार में सुख
  • कठिनाइयों से मुक्ति
  • धन और सौभाग्य
  • संतान की उन्नति
  • मानसिक संतुलन

जैसे अनेक सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।


🌟 6. आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली दिन

मोक्षदा एकादशी के दिन:

  • ध्यान जल्दी लगता है
  • मन स्थिर होता है
  • जप का फल 100 गुना तक बढ़ जाता है
  • शरीर और मन दोनों ऊर्जावान रहते हैं
  • ईश-भक्ति का अनुभव गहरा हो जाता है

यह दिन साधकों के लिए “Energy Gateway” की तरह काम करता है।


🌟 7. इस दिन पापों का क्षय कई गुना तेज होता है

हर एकादशी पाप नाशक है,
लेकिन मोक्षदा एकादशी में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि:

  • गीता की ऊर्जा जागृत
  • विष्णु की विशेष कृपा
  • पितृ शांति का योग
  • चंद्र और सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा

एक साथ सक्रिय होती हैं।

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🌟 8. यह व्रत हर परिस्थिति में सरल है

इस एकादशी की एक खास बात यह है कि:

✔ फलाहार से भी किया जा सकता है

✔ जल-फल पर भी संभव

✔ व्रत सिर्फ मानसिक संकल्प से भी सिद्ध हो जाता है

भगवान कृष्ण भाव के भूखे हैं—
इसलिए यह व्रत भाव से ही फल देता है।


🌟 9. वास्तविक अनुभव

बहुत लोगों ने बताया है कि:

  • व्रत रखने के बाद घर में अशांति समाप्त हुई
  • काम में अचानक तरक्की मिली
  • पुराने पितृ संबंधी अड़चनें गायब हो गईं
  • मानसिक बोझ हल्का हो गया
  • जीवन में दिव्य शांति अनुभव हुई

यह सब मोक्षदा एकादशी की दिव्य ऊर्जा के कारण होता है।


FAQs

Q1. मोक्षदा एकादशी सबसे पवित्र क्यों है?

क्योंकि यह पितृ मोक्ष, आत्मशुद्धि और गीता जयंती का संयुक्त दिवस है।

Q2. क्या यह एकादशी पाप नष्ट करती है?

हाँ, यह पापों को जड़ से मिटाती है।

Q3. क्या पितरों के लिए पूजा जरूरी है?

हाँ, पितृ शांति के लिए संकल्प लेना अत्यंत शुभ है।

Q4. क्या यह व्रत फलाहार से किया जा सकता है?

हाँ, यह सबसे सरल एकादशियों में से एक है।

Q5. इस दिन कौन-सा मंत्र जपें?

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और गीता पाठ श्रेष्ठ है।

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