Aaj Kaun Si Tithi Hai? – आज कौन सी तिथि है? पूरा 1200 शब्दों का विस्तृत लेख

By JayGuruDev

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Aaj kaun si tithi hai Hindu calendar

Aaj Kaun Si Tithi Hai? – आज कौन सी तिथि है? पूरा 1200 शब्दों का विस्तृत लेख

भारतीय पंचांग में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है —
“Aaj kaun si tithi hai?”

क्योंकि हिंदू धर्म में हर तिथि का अपना महत्व, ऊर्जा, प्रभाव और शुभ-अशुभ फल होता है।
तिथि जानना सिर्फ पूजा या व्रत के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर निर्णय के लिए आवश्यक होता है:

  • विवाह
  • गृह प्रवेश
  • पूजा
  • यात्रा
  • निवेश
  • नया काम
  • और दैनंदिन शुभ कार्य

सब तिथि देखकर ही किए जाते हैं।

इस लेख में हम समझेंगे:

  • तिथि क्या होती है?
  • आज कौन सी तिथि है?
  • तिथि के प्रकार
  • तिथि का महत्व
  • हर तिथि का शुभ-अशुभ प्रभाव
  • किस तिथि में कौन सा काम करें
  • तिथि का आध्यात्मिक अर्थ

आइए “Aaj kaun si tithi hai” को संपूर्ण रूप से समझते हैं।


🌙 1. तिथि क्या होती है? (What Is a Tithi)

तिथि चंद्रमा और सूर्य की दूरी से बनती है।
चंद्रमा प्रतिदिन लगभग 12° आगे बढ़ता है, और जैसे ही सूर्य–चंद्र का यह अंतर बदलता है, नई तिथि शुरू होती है।

एक माह में कुल 30 तिथियाँ होती हैं:

  • 15 शुक्ल पक्ष की
  • 15 कृष्ण पक्ष की

यानी, चंद्रमा हर 30 दिनों में एक पूरा चक्कर लगाता है और 30 तिथियाँ बनती हैं।


🌟 2. तिथि कितने प्रकार की होती है?

एक माह के 30 दिन 30 तिथियों में बांटे जाते हैं:

  1. प्रतिपदा
  2. द्वितीया
  3. तृतीया
  4. चतुर्थी
  5. पंचमी
  6. षष्ठी
  7. सप्तमी
  8. अष्टमी
  9. नवमी
  10. दशमी
  11. एकादशी
  12. द्वादशी
  13. त्रयोदशी
  14. चतुर्दशी
  15. पूर्णिमा / अमावस्या

हर तिथि का अपना स्वभाव, अर्थ और प्रभाव होता है।


🌞 3. आज कौन सी तिथि है? – (Evergreen Format)

क्योंकि आपका लेख evergreen content है, इसलिए यहाँ हर तिथि का अर्थ दिया जा रहा है,
जिससे कोई भी व्यक्ति “आज कौन सी तिथि है” देखकर उसका महत्व समझ सके।


🔱 4. 30 तिथियों का अर्थ, महत्व और प्रभाव

1️⃣ प्रतिपदा (Pratipada)

नई शुरुआत का दिन।
नया काम, संकल्प, सीखने के लिए श्रेष्ठ।

2️⃣ द्वितीया (Dwitiya)

परिवार और संबंधों के लिए शुभ।
शांति और सौभाग्य।

3️⃣ तृतीया (Tritiya)

सौभाग्य का दिन।
गौरी–पूजन और अच्छे कार्य।

4️⃣ चतुर्थी (Chaturthi)

गणेश जी का दिन।
व्रत और बुद्धि की प्राप्ति।

5️⃣ पंचमी (Panchami)

विद्या, धर्म और शिक्षा के लिए श्रेष्ठ।

6️⃣ षष्ठी (Shashthi)

स्कंद माता का दिन।
स्वास्थ्य और शक्ति में वृद्धि।

7️⃣ सप्तमी (Saptami)

तेज, ऊर्जा और साहस।
सूर्य पूजन अत्यंत शुभ।

8️⃣ अष्टमी (Ashtami)

महादुर्गा का दिन।
शक्ति साधना, उपवास शुभ।

9️⃣ नवमी (Navami)

बल, आत्मविश्वास और धार्मिक कार्यों का दिन।

🔟 दशमी (Dashami)

विजय का दिन।
नई यात्रा, अच्छे कार्य।

1️⃣1️⃣ एकादशी (Ekadashi)

सबसे पवित्र तिथि।
उपवास, मन की शुद्धि, अध्यात्म।

1️⃣2️⃣ द्वादशी (Dwadashi)

व्रत पारण, धन लाभ।
समर्पण और पुण्य।

1️⃣3️⃣ त्रयोदशी (Trayodashi)

स्वास्थ्य, दीर्घायु का दिन।
धनतेरस इसी तिथि को आता है।

1️⃣4️⃣ चतुर्दशी (Chaturdashi)

गहन साधना का दिन।
कैलाश ऊर्जा प्रबल।

1️⃣5️⃣ पूर्णिमा (Purnima)

चंद्रमा पूर्ण।
भावनाएँ प्रबल, ध्यान श्रेष्ठ।

1️⃣5️⃣ अमावस्या (Amavasya)

पितृ तिथि।
साधना, पितृ-तर्पण, मन की गहराई।


🌕 शुक्ल पक्ष बनाम कृष्ण पक्ष

शुक्ल पक्ष

चंद्रमा बढ़ता है → ऊर्जा बढ़ती है
→ शुभ कार्य, पूजा-पाठ, सफलता

कृष्ण पक्ष

चंद्रमा घटता है → भीतर की यात्रा
→ ध्यान, साधना और मन-चिंतन


🕉️ 5. “Aaj kaun si tithi hai” जानना क्यों जरूरी है?

तिथि आपके दिन को प्रभावित करती है:

  • मानसिक स्थिति
  • नसीब
  • निर्णय
  • सफलता
  • पूजा–व्रत
  • नए काम का परिणाम

हर तिथि की अपनी ऊर्जा (vibration) होती है।

उदाहरण:

  • एकादशी = मन शांति
  • अष्टमी = शक्ति
  • चतुर्थी = बुद्धि
  • सप्तमी = तेज
  • पूर्णिमा = भावना
  • अमावस्या = ध्यान

इसलिए तिथि जानना आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से जरूरी है।


📅 6. किस तिथि में कौन सा काम करना चाहिए?

शुभ तिथियाँ:

  • तृतीया
  • पंचमी
  • सप्तमी
  • नवमी
  • दशमी
  • पूर्णिमा
  • एकादशी

इनमें करें:

  • खरीदारी
  • यात्राएँ
  • पूजा
  • विजय कार्य
  • निवेश
  • विवाह (कुछ तिथियों में)

अशुभ या सावधानी वाली तिथियाँ:

  • चतुर्थी
  • अष्टमी (कुछ कार्यों के लिए)
  • ग्यारहवीं रात (कृष्ण पक्ष)
  • अमावस्या (कुछ कर्मकांडों को छोड़)
  • चतुर्दशी

इनमें टालें:

  • बड़ा निवेश
  • अशुभ कार्य
  • वाद-विवाद
  • यात्रा (कभी-कभी)

🌼 7. तिथि और चंद्रमा का संबंध

चंद्रमा हमारे:

  • मन
  • भावनाओं
  • विचार
  • नींद
  • निर्णय
  • व्यवहार

पर असर करता है।
इसलिए तिथि का प्रभाव सीधा मानसिक ऊर्जा पर पड़ता है।


🔮 8. तिथि का आध्यात्मिक महत्व

भारतीय ऋषियों ने हर तिथि को एक आध्यात्मिक स्तर से जोड़ा है।

तिथि से:

  • मन की शुद्धि
  • जीवन की दिशा
  • कर्म का फल
  • ध्यान की शक्ति
  • देवताओं की कृपा

सब प्रभावित होते हैं।

उदाहरण:

  • पूर्णिमा = ब्रह्म ऊर्जा का उत्कर्ष
  • अमावस्या = आत्मचिंतन का शिखर
  • एकादशी = मन की शुद्धि
  • अष्टमी = शक्ति का उदय

🌟 9. निष्कर्ष – तिथि जानना जीवन की दिशा जानना है

तिथि सिर्फ एक कैलेंडर की तारीख नहीं,
बल्कि:

  • आध्यात्मिक संकेत
  • ऊर्जा का प्रवाह
  • शुभ-अशुभ का ज्ञान
  • जीवन के निर्णयों का मार्गदर्शन

जब आप यह पूछते हैं—
“Aaj kaun si tithi hai?”
तो आप अपने दिन की सही समझ प्राप्त करते हैं।

हर तिथि ईश्वर का संदेश है—
कभी शक्ति का, कभी शांति का, कभी साधना का, और कभी सफलता का।


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FAQs

तिथि कैसे बदलती है?

चंद्रमा और सूर्य की दूरी 12° बदलने पर नई तिथि शुरू होती है।

एक माह में कितनी तिथियाँ होती हैं?

कुल 30: 15 शुक्ल पक्ष + 15 कृष्ण पक्ष।

कौन-सी तिथि सबसे शुभ है?

तृतीया, पंचमी, सप्तमी, नवमी, दशमी, एकादशी और पूर्णिमा।

अमावस्या तिथि कैसी होती है?

आत्मचिंतन, पितृ कर्म और साधना के लिए श्रेष्ठ।

तिथि देखने से क्या लाभ होता है?

शुभ-अशुभ समय, पूजा, यात्रा, निवेश और निर्णय सही बनते हैं।

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