भैरव शाबर मंत्र भारतीय लोक-तांत्रिक और शैव परंपरा का एक विशेष भाग माने जाते हैं। ये मंत्र संस्कृत के बजाय लोक-भाषा, अपभ्रंश और क्षेत्रीय शब्दों में रचे गए हैं, ताकि सामान्य साधक भी उन्हें स्मरण कर सके।
धार्मिक ग्रंथों और लोक-मान्यताओं के अनुसार, भैरव को रक्षक, क्षेत्रपाल और विघ्न-नाशक देवता के रूप में पूजा जाता है।
शाबर मंत्र क्या होते हैं?
शाबर मंत्र वे मंत्र माने जाते हैं जो:
- सरल भाषा में होते हैं
- जटिल वैदिक छंदों पर आधारित नहीं होते
- लोक-परंपरा से जुड़े होते हैं
इन्हें मुख्यतः नाथ-पंथ, शैव और तांत्रिक परंपराओं से जोड़ा जाता है।
भैरव शाबर मंत्रों की धार्मिक भूमिका
परंपरागत मान्यताओं में भैरव शाबर मंत्रों का प्रयोग:
- भय से रक्षा
- मानसिक दृढ़ता
- आत्म-संरक्षण
- बाधा-निवारण
- साधक में साहस और स्थिरता
जैसे उद्देश्यों से जुड़ा बताया गया है।
⚠️ धार्मिक ग्रंथ स्वयं भी कहते हैं कि ऐसे मंत्रों का दुरुपयोग या अहंकार-वश प्रयोग वर्जित है।
विभिन्न प्रकार के भैरव शाबर मंत्र (Classification)
धार्मिक साहित्य में भैरव मंत्रों को सामान्यतः इन श्रेणियों में बताया गया है:
- रक्षा और भय-निवारण से जुड़े मंत्र
- विघ्न-नाश और कार्य-सिद्धि से संबंधित मंत्र
- आरोग्य और शिशु-रक्षा से जुड़े मंत्र
- आत्मिक बल और मानसिक स्थिरता हेतु मंत्र
इनका विवरण अक्सर लोक-ग्रंथों और तांत्रिक संग्रहों में मिलता है।
आधुनिक दृष्टिकोण से समझना क्यों ज़रूरी है?
आज के समय में इन मंत्रों को:
- धार्मिक-ऐतिहासिक अध्ययन
- सांस्कृतिक परंपरा
- लोक-आस्था का प्रतिबिंब
के रूप में समझना अधिक उपयुक्त माना जाता है, न कि शाब्दिक प्रयोग-विधि के रूप में।
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महत्वपूर्ण चेतावनी (Very Important)
यह लेख:
- किसी भी तांत्रिक क्रिया को करने की सलाह नहीं देता
- न ही किसी प्रकार की हिंसा, भय या नुकसान को प्रोत्साहित करता है
ऐसे मंत्रों का उल्लेख केवल धार्मिक-सूचनात्मक संदर्भ में किया गया है।
FAQs
Q1. भैरव शाबर मंत्र क्या हैं?
ये लोक-तांत्रिक परंपरा से जुड़े सरल मंत्र माने जाते हैं।
Q2. क्या ये वैदिक मंत्र होते हैं?
नहीं, ये वैदिक छंदों पर आधारित नहीं होते।
Q3. क्या आज के समय में इनका प्रयोग उचित है?
आज इन्हें धार्मिक-ऐतिहासिक संदर्भ में समझना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
Q4. भैरव को किस रूप में पूजा जाता है?
रक्षक, क्षेत्रपाल और विघ्न-नाशक देवता के रूप में।
Q5. क्या इन मंत्रों से डरने की आवश्यकता है?
नहीं, सही समझ और श्रद्धा के साथ इन्हें सांस्कृतिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।
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