मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष माह की शुक्ल एकादशी को आती है और इसे सभी एकादशियों में सबसे पवित्र और फलदायी माना गया है।
यह व्रत विशेष रूप से पितृ मोक्ष, पाप क्षय, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
कई बार लोग व्रत करते तो हैं, लेकिन सही विधि न जानने के कारण पूरा फल नहीं मिल पाता।
इसलिए यहाँ मोक्षदा एकादशी की सही और सरल पूजा विधि विस्तार से दी जा रही है।
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🌟 1. व्रत का संकल्प (सबसे आवश्यक चरण)
पूजा शुरू करने से पहले यह संकल्प लें:
✔ “मैं भगवान विष्णु की कृपा और पितृ शांति के लिए मोक्षदा एकादशी का व्रत कर रहा/रही हूँ।”
✔ “मेरा व्रत सफलता और पवित्रता के साथ पूर्ण हो।”
संकल्प दाहिने हाथ में जल लेकर बोलें।
🌟 2. सुबह का शुद्ध स्नान और तैयारी
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें
- गंगाजल मिलाकर स्नान करें
- साफ, हल्के पीले या सफेद वस्त्र पहनें
- पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें
घर में सुगंधित धूप, दीपक और शांत वातावरण बनाएँ।
🌟 3. भगवान विष्णु की मुख्य पूजा विधि
एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएँ और उस पर भगवान विष्णु, कृष्ण या गीता का चित्र स्थापित करें।
✔ पूजा सामग्री
- तुलसी की माला
- पीला पुष्प
- धूप-दीप
- नैवेद्य
- गंगाजल
- चंदन
- फल
✔ पूजा विधि
1️⃣ दीपक जलाएँ
2️⃣ गंगाजल छिड़कें
3️⃣ चंदन, पुष्प, अक्षत अर्पित करें
4️⃣ तुलसीदल चढ़ाएँ (सबसे महत्वपूर्ण)
5️⃣ भगवान विष्णु का मंत्र जप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
6️⃣ विष्णु सहस्रनाम या गीता का अध्याय 12/15/18 पढ़ें
7️⃣ आरती करें
🌟 4. गीता पाठ – मोक्षदा एकादशी का विशेष नियम
इस दिन गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह गीता जयंती भी है।
✔ कौन-सा अध्याय पढ़ें?
- अध्याय 12 (भक्ति योग)
- अध्याय 18 (मोक्ष योग)
या - पूरी गीता यदि संभव हो।
गीता पाठ इस व्रत का बहुत बड़ा पुण्य बढ़ाता है।
🌟 5. पितृ मोक्ष के लिए विशेष विधि
मोक्षदा एकादशी विशेष रूप से पितृ दोष दूर करने वाली है।
✔ विधि
- पितरों के नाम से दीपक जलाएँ
- “ॐ पितृदेवाय नमः” मंत्र का जप करें
- जल अर्पित करें
- उनके लिए शांति और उन्नति की प्रार्थना करें
इससे परिवार की रुकावटें और अनचाहे कष्ट दूर होने लगते हैं।
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🌟 6. व्रत कैसे रखें? (Complete Fasting Guide)
मोक्षदा एकादशी में व्रत रखने के 3 तरीके हैं:
✔ 1. निर्जला व्रत (सर्वश्रेष्ठ)
- पूरा दिन बिना जल और भोजन के
- केवल मंत्र जप और ध्यान
✔ 2. जल-फल व्रत
- फल + पानी + दूध
- केवल सात्त्विक फलाहार
✔ 3. फलाहार व्रत
- फल, दूध, मूंगफली, नारियल, व्रत अनाज
- नमक न डालें
किसी भी प्रकार का व्रत करें—मन शुद्ध और दयालु होना चाहिए।
🌟 7. रात्रि पूजा और जागरण
रात में भगवान विष्णु का ध्यान करें और नामस्मरण करें:
✔ “श्रीराम जय राम जय जय राम”
✔ “हरे कृष्ण हरे राम”
✔ “ॐ नमो नारायणाय”
रात्रि में आधा जागरण करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
🌟 8. द्वादशी पारण – व्रत कैसे खोलें?
अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण (व्रत खोलना) करें:
✔ किसी ब्राह्मण या भूखे व्यक्ति को भोजन कराएँ
✔ तुलसी दल के साथ खीर अर्पित करें
✔ फिर स्वयं व्रत तोड़ें
सही समय पर पारण करना बहुत आवश्यक है।
🌟 9. मोक्षदा एकादशी में क्या न करें?
- क्रोध न करें
- नशा, मांसाहार, प्याज, लहसुन से बचें
- झूठ न बोलें
- किसी को अपमानित न करें
- दोपहर में सोना नहीं
- काले विचारों से दूर रहें
व्रत की पवित्रता ही इसका मुख्य आधार है।
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🌟 10. मोक्षदा एकादशी का शक्तिशाली लाभ
जो व्यक्ति श्रद्धा से यह व्रत करे:
✔ पापों का नाश
✔ पितृ शांति
✔ मन की शुद्धि
✔ धन-लाभ
✔ आध्यात्मिक उन्नति
✔ भगवान विष्णु की विशेष कृपा
✔ रुकावटों से मुक्ति
यह व्रत साधक के जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकता है।
❓ FAQs
सवेरे स्नान, संकल्प, विष्णु पूजा, गीता पाठ, व्रत और अगले दिन पारण करें।
हाँ, यह विशेष रूप से पितृ शांति के लिए जाना जाता है।
नहीं, कोई भी व्रत प्रकार किया जा सकता है।
वे फलाहार व्रत कर सकते हैं।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” सर्वोत्तम है।
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